शुक्रवार, 8 जनवरी 2021

प्रेम

🌹प्रेम से जिसके हृदय को प्रेम है🌹🌹

🌹जो हृदय कष्ट के लिए आतुर है  🌹🌹

🌹बिना सोचे जो मरने को तैयार है   🌹🌹

🌹छोड़ पतवार डूबता जो मझधार है    🌹🌹 

🌹उसी हृदय को बस प्रेम का अधिकार है🌹🌹



गुरुवार, 7 जनवरी 2021

नारी पराकाष्ठा

मैं उपासना शबरी की 🦋

मैं दृढ़ता उर्मिला की 

मैं प्रतीक्षा अहिल्या की 

मैं सहनशीलता सीता की 

मैं शपत पांचाली केश की 

मैं पुत्र तपस्या कुंती की 

मैं सौ सूत क्षति गाँधारी की

मैं सत् हठिता सावित्री की🦋

मैं पति आज्ञा मांडवी की

मैं विदुषिता अनुसूया की

मैं अवहेलना यशोधरा की

मैं पुनीता सुलोचना की

मैं भक्ति लगन मीराँ की

मैं प्रेम पराकाष्ठा राधा की

मैं हूँ हर कथा नारी की🦋



मेघदूत

 🌹 हे घन मेघदूत 

🌹 कालीदास के 

🌹 सुनो पुकार 

🌹 द्रवित हृदय 

🌹 लगाए गुहार 

🌹 नहीं बरसों अभी 

🌹 धरा पर है सकुचाई

🌹 नहीं आगमन 

🌹 सदैव तुम्हारा 

🌹 होता फलदायी

🌹 शीत बढा है अभी 

🌹 धरा पर लौट जाओ

🌹 आना जब आए 

🌹 श्रावण मास 

🌹 मत सताओ

🌹 गाएगें तब मिल के 

🌹 राग मल्लार 

🌹 अभी तुम लौट जाओ


बुधवार, 6 जनवरी 2021

यादों की मूरत

मेरी तन्हाईयों की शक्ल हो तुम  

खयालों के औजारों से तराशी 

यादों की नक्काशी से सजी 

तमाम उम्र की फुर्सत से बनी 

इंतजार के मोतियों की सजी 

अरमानों के जेवर पहनाकर 

उतार पाया हूँ दिल का खालीपन 

तब कहीं निखार ला पाया हूँ 

तमाम मोहब्बत से बेपनाह हुस्न पर



कल्पना

कैसी माया हो 

कभी नहीं स्थिर रहती 

कैसी छाया हो 

कभी ना मुझसे मिलती 

कैसी काया हो 

कभी ना तुम मुरझाती 

नहीं हो मेरी फिर भी 

रोज मेरी बन जाती 

मुझसे ही सजती सँवरती 

फिर भी मुझे सताती 

तुम मेरी हो वो कल्पना 

नित यौवन चढती जाती


प्रतिक्षा

 रोज राह देखत शबरी 

आवत मोरे राम 

अब तो शबरी बनी अहिल्या 

थक गई मेरे राम 

अहिल्या बन भी जुग बीता 

कब आओगे राम 

बाकी रहा अब बन सीता 

समा जाऊं धरती पाश 

तुम ना आओ प्रभु मेरे तो 

मैं आऊँ साकेत धाम 



मैं हूँ प्रतीक्षा लम्बे युग की 

मैं मूरत पत्थर की 

भरो इसमें तुम संवेदना 

बना दो मुझको नारी 

सदियां बीती राह देखते 

लो डगर इधर की 

बनो वैद्य समझो वेदना 

हरो पीड़ा मन की




मंगलवार, 5 जनवरी 2021

परवाना

लाख कमियां है मुझ में 

एक खूबी तुझे चाहने की है 

बचना है लाख कमियों से तुझे 

या तमन्ना एक खूबी पे मरने की है 

जल जाऊं तेरे ही ईर्द-गिर्द 

यह हसरत इस परवाने की है 

बता शमा जलना है रोशनी के लिए 

या नियत मेरे साथ बुझने की है



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