मैं सरल
मैं सहज
निभाऊँ प्रीत
जानू ना रीत
तेरे जग की
मैं भोली
अलबेली
मनमौजी
हूँ अपने ही
ढंग की
मैं सलोनी
हूँ साँवली
पर हूँ
सच्ची अपने
मन की
विश्व_आदिवासी_दिवस
मैं सरल
मैं सहज
निभाऊँ प्रीत
जानू ना रीत
तेरे जग की
मैं भोली
अलबेली
मनमौजी
हूँ अपने ही
ढंग की
मैं सलोनी
हूँ साँवली
पर हूँ
सच्ची अपने
मन की
विश्व_आदिवासी_दिवस