😇क्यूँ रहती है इतनी उलझन 😨
😇उलझन भी उलझ उलझ जाती 😨
😇उलझन को जब सुलझाना चाहो😨
😇सुलझन भी उलझ कर रह जाती😨
😇कैसे सुलझे उलझन ये बोलो 😨
😇राज इस उलझन के खोलो 😨
😇उलझन से सुलझन निकलती 😨
😇या सुलझन में उलझन है बोलो 😨
😱😱😱😱😱😱😱😱😱😱😱😱
😇क्यूँ रहती है इतनी उलझन 😨
😇उलझन भी उलझ उलझ जाती 😨
😇उलझन को जब सुलझाना चाहो😨
😇सुलझन भी उलझ कर रह जाती😨
😇कैसे सुलझे उलझन ये बोलो 😨
😇राज इस उलझन के खोलो 😨
😇उलझन से सुलझन निकलती 😨
😇या सुलझन में उलझन है बोलो 😨
😱😱😱😱😱😱😱😱😱😱😱😱
🤲प्रार्थना वो चुम्बक है जो 🙏
🙌ईश्वर को भी आकर्षित करती है🙏
🤲भक्ति वो शक्ति है जो 🙏
👐ईश्वर को भी खोज सकती है🙏
🙌करें प्रार्थना भक्ति से तो🙏
👏मूरत भी बोल सकती है🙏
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
💏हृदय सिहांसन पर विराजित 💞 🌹
💑तुमसे रहे माँग सुशोभित 💗🌹
💏थी मैं अबोध मन कलुषित 💓 🌹
💑दिया है बोध पावन धवलीत 💗🌹
💏जब जब घबराई मैं सकुचाई 💞🌹
💑शक्ति संचरित तुमसे है पाई 💗🌹
💏समय समय पर तुमने तारा 💓 🌹
💑थामा हस्त मुझको उभारा 💞 🌹
💏सदा रहे वरद् हस्त मुझ पर 💗🌹
💑छाया रहे मुझ नन्ही पौधे पर 💓 🌹
⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘
🦋🦋🦚🦋🦋🦚🦋🦋🦚🦋🦋🦚
💗कत्ल हो जाता आज मेरा तो
💚मैं तो बस बाल-बाल बचा
💙घायल परिंदा आज तो
💘उसके नजरे तीर से बचा
🧡ताउम्र रहेगा एहसान उसका मुझ पर
❤जो वो सामने मेरे आने से बचा
💜इल्जाम लग जाता बेवजह उस पर
💛वो तो इस कसूर-ए-खता से बचा💓💞
ए भारत के राजनेताओं
दिया था हक किसने ये तुमको
करो बंटवारा माँ वसुधा का
बना दो भारत पाकिस्तान को
नहीं बांटा हिंदू मुस्लिम को
बांटा तुमने माँ भारती को
काटा तुमने उस हिस्से को
जिस में बसी आत्मा इसकी
बिलखती आज देख मोहन जोदारो को
याद आती है तक्षशिला की
लव का बसा लाहौर भी छीना
छीनी विरासत हड़प्पा की
सिंध गया तो हिंद गया
क्यों ना तड़पे आत्मा इसकी
जिस नदी से पनपी सभ्यता हिंद की
वो नदी भी छीनी इसकी
जीवन क्या है कैसे हुई उत्पत्ति इसकी
दर्शन हो या विज्ञान एक बात है दोनों की
पांच तत्वों से बना है जीवन
दर्शन कहो या वैज्ञानिक
देखो इसको समझो इसको
बात है प्यारे नक्की
दर्शन - विज्ञान
अरस्तू - मिलर
वायु - N(नाइट्रोजन) - बना न्यूक्लिक एसिड D.N.A
जल - H-2-0 - बना जीव द्रव्य
पृथ्वी - तत्व - बना शारीरिक पदार्थ
आकाश - ऊर्जा - पोषण -निरंतर चला जीवन
अग्नि - ऊर्जा - सतत पोषण
पहेले भगाओ दुर्गुण स्वयं के फिर भगाओ विदेशी
आए कहां से जाना कहां है सब हैं इस धरा पे विदेशी
नहीं किया अंतर जब धरा ने तुममे आई भावना क्यूँ ऐसी
अपनाया सबको धरा ने नहीं पूछा क्या जात है किसकी
नहीं किया अंतर जब धरा ने मैं स्वदेशी तू परदेसी
कैसे होगए अलग-अलग वसुधा है जब एक ही सबकी
एक जननी के लाल अलग हो कर दी तुमने बात ही कैसी है