shabdika
Veena Mawar Author
बुधवार, 29 दिसंबर 2021
नीड़
आजा सांझ हुई, ढूंढे तुझे मेरी नज़र
मैं पंछी तेरे नीड़ का, तू ही है मेरी डगर
तुम मेरे हर असफल प्रयास का सफल नतीजा हो
जिंदगी की बेतरतीब व्यवस्था को जीने सलीका हो
इतनी सारी गरम परतें भी
नहीं रोक पा रही तेरी यादों की ठंड
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Art work
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें